अखंड सौभाग्य की कामना से सुहागिन महिलाएं आज ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या सोमवार को कृत्तिका नक्षत्र व सुकर्मा योग के साथ सोमवती अमावस्या तथा शनि जयंती के दुर्लभ संयोग में वट सावित्री का व्रत करेंगी I आज महिलाएं व्रत-उपवास कर वट वृक्ष के नीचे सावित्री, सत्यवान एवं यमराज की पूजा-अर्चना कर देवी सावित्री के त्याग, पति प्रेम एवं पति व्रत धर्म का स्मरण करेंगी । यह व्रत स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक, पापहारक, दुःखप्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला होता है। बरगद के पेड़ की शाखाओं में ब्रह्मा, शिव, विष्णु,एवं स्वयं सावित्री विराजमान रहती है I अग्नि पुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है I इसीलिए संतान प्राप्ति के लिए भी महिलाएं भी इस व्रत को करती हैं। अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्वर माना गया है। इसीलिए इस वृक्ष कई जड़ में पूजा करने से सर्व मनोकामना की पूर्ति एवं बच्चों की निरोग काया व विकास का वरदान मिलता है I
सर्वार्थ सिद्धि योग में वट सावित्री व्रत
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के सदस्य आचार्य राकेश झा ने बताया कि आज ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या सोमवार को वट सावित्री का व्रत सर्व सिद्धि को देने वाला संयोग बना है I इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, शनि जयंती के साथ इस साल का अंतिम सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है I इस दिन स्नान-दान, पितरों की पूजा के शनि की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के जीवन में तरक्की के आसार, सफलता, पितृ दोष से छुटकारा व शनिदोष से लाभ मिलेगा I
मिलेगा अखंड सुहाग का वरदान
ब्रह्मवैवर्त्तपुराण तथा स्कन्द पुराण के अनुसार वट सावित्री का व्रत में श्रद्धा, भक्ति व निष्ठा से वट वृक्ष की पूजा व परिक्रमा करने से सुहागिनों को अखंड सुहाग, पति की दीर्घायु, वंश वृद्धि, दांपत्य जीवन में सुख-शांति तथा वैवाहिक जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं I पूजा के उपरान्त भक्तिपूर्वक सत्यवान-सावित्री की कथा का श्रवण और वाचन करना चाहिए। इससे परिवार पर आने वाली अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। उन्होंने कहा कि इस दिन गंगा या तीर्थ में स्नान करने से सहस्त्र गौदान, कोटि सुवर्ण दान के बराबर फल मिलता हैं I वट की पूजा और परिक्रमा के बाद अन्न, तिल, ऋतुफल आदि का दान करने से समृद्धि तथा गृहस्थ आश्रम ने शांति बनी रहती हैं I
नवविवाहिता करेंगी विस्तृत पूजन
पंडित राकेश झा ने कहा कि वट सावित्री की पूजा में मिथिलांचल की नवविवाहिता पुरे विस्तार से वट की पूजा-अर्चना करेंगी I शादी के बाद प्रथम बरसाईत में पुरे दिन उपवास कर सोलह श्रृंगार कर आंगन को अरिपन से लेप कर पति-पत्नी संग में वट की पूजा नियम-निष्ठा से करने के बाद चौदह बांस से निर्मित लाल-पीला रंग में रंगा हुआ हाथ पंखा से वट वृक्ष को हवा देंगी I इस पूजा में आम और लीची की प्रधानता रहती है I गुड्डा-गुड़िया को सिंदूर दान भी होगा I अहिबातक पातिल यानि रंगा हुआ घड़ा में पूजन की दीपक प्रज्ज्वलित रहेगी I वर पूजा के बाद नव दंपति को बड़े-बुजर्ग महिलाएं धार्मिक व लोकाचार की कई कथाएं सुनाएगी I उसके बाद पांच सुहागिन महिलाएं नवविवाहिता के साथ खीर, पूरी व ऋतुफल का प्रसाद ग्रहण करेंगी I आगंतुक महिला श्रद्धालु एवं कथावाचिका को अंकुरित चना, मुंग, फल, बांस का पंखा देकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करेंगी I
यम के भय को दूर करता वट वृक्ष
वैदिक गंथों, उपनिषद्य व पौराणिक ग्रंथों में मृत्यु को भी चुनौती देने वाले वट प्रजाति के वृक्षों में बरगद को अमूल्य बताया गया है I इसकी जड़, छल, पत्ता, दूध, छाया तथा हवा न सिर्फ मनुष्यों बल्कि पृथ्वी, प्रकृति एवं समस्त जीव-जंतुओं के लिए जीवन रक्षक माना गया है I मनुष्य के शरीर में बिमारियों के रूप में यदि यमदूत प्रवेश कर गया हो और वह इस वृक्ष की शरण में चला जाए, तो जैसे सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज के हाथ से जीवित लौटने में सफलता हासिल की थी I उसी प्रकार सामान्य व्यक्ति भी यमदूतो से मुक्ति पा सकता है I इसकी हवा से मन की शक्ति बढ़ती है I मन मजबूत हो तो काल को भी परास्त किया जा सकता है I
पूजा का शुभ मुहूर्त :
तिथि के मुताबिक: प्रातः 05 बजे से शाम 03:47 बजे तक
शुभ योग मुहूर्त: सुबह 08 :24 बजे से 10 :05 बजे से
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11: 20 बजे से 12:14 बजे तक
गुलीकाल व चर मुहूर्त: दोपहर 01:29 बजे से शाम 03:11 बजे तक



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