बिहार के सरकारी विद्यालयों को बेहतर बनाने में अब सरकार ही नहीं। बल्कि हर कोई अपने तरीके से योगदान दे सकेगा। यह योगदान बच्चों को पढ़ाने लिखाने से लेकर उनके खाने-पीने से जुड़ी सुविधाओं को जुटाने और आधारभूत संरचना आदि से जुड़े होंगे।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत केंद्रीय प्रायोजित विद्यांजलि योजना मार्च से लागू होगी। इस योजना के दायरे में 90 हजार से अधिक प्रारंभिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों को लाभ मिलेगा।
पूर्ववर्ती छात्रों और ऐसे स्थानीय लोगों को इस मुहिम से जोड़ा जाएगा। जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। और खुद को सामाजिक विकास से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रखते हैं। शिक्षा विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि विद्यांजलि योजना के तहत कोई भी व्यक्ति स्कूलों को बेहतर बनाने में इस मुहिम से जुड़ सकता है। इसके जरिए वह अपने हिसाब से मदद कर सकता है।
जरूरी नहीं कि यह मदद आर्थिक ही हो। यदि वह इन स्कूलों में कुछ समय के लिए बढ़ाना चाहता है। या बच्चों को किसी के लिए विशेष हुनर से प्रशिक्षित करना चाहता है। तो वह भी कर सकता है। विद्यालय से जुड़े जिन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग किया जा सकता है। उनमें छोटे-मोटे निर्माण इलेक्ट्रिक वर्क जैसे पंखा वायरिंग और वाटर कूलर आदि के साथ कंप्यूटर, लैपटॉप और डिजिटल बोर्ड आदि शामिल है। इसके साथ ही खेलकूद, योगा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अतिरिक्त गतिविधियों जैसे जिम आदि से जुड़े उपकरण, लर्निंग मटेरियल, ऑफिस स्टेशनरी, फर्नीचर आदि शामिल है।
यह लोग कर सकते हैं जनभागीदारी
विद्यांजलि योजना के तहत जो लोग इसमें जनभागीदारी कर सकते हैं। उसमें पूर्व छात्र सेवानिवृत्ति शिक्षक, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, बैंक अफसर और कर्मी, सेना और अर्धसैनिक बलों से जुड़े लोग, सेल्फ एंप्लॉयड, प्रोफेशनल स्किल से जुड़ा कोई भी व्यक्ति या कोई भी सामान्य व्यक्ति, कंपनी, संस्था आदि इसमें अपने तरीके से सहयोग दे सकेंगे।

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