सुरंग के दीवारों पर दिखेगी खूबसूरत कलाकृति।
बता दें कि बरियारपुर से जमालपुर की ओर आने से पहले सुरंग के प्रवेश द्वार की बायीं ओर विशाल कैनवास बनाया गया है। इस पर लगभग एक दर्जन से अधिक ऐतिहासिक धरोहरों के चित्र को प्रदर्शित किया गया। चित्र में जहां हवेली खरगपुर झील, श्रीकृष्ण सेतु मुंगेर गंगापुल, कष्ट हरनी घाट, भीम बांध, मुंगेर का किला, चंडिका स्थान, जैसे दर्जनों ऐतिहासिक धरोहरों को दर्शाया गया है। सुरंग से बाहर निकलने के बाद मुंगेर का कर्ण चौराहा, योग आश्रम सहित कई ऐतिहासिक स्मारकों को चित्र के माध्यम से दिखाया गया है।
लाइटिंग की होगी बेहतर व्यवस्था।
मालूम हो कि जमालपुर में बनी यह बिहार की दूसरी सुरंग ऑस्ट्रेलियन टेक्नोलॉजी से बनी है। इस सुरंग के अंदर पहली बार लोग अंधेरे का अनुभव नहीं करेंगे। सुरंग के अंदर भी ट्यूबलाइट और बल्ब लगे हुए होंगे। इससे यात्रियों को पता ही नहीं चलेगा कि कब हमने सुरंग में प्रवेश किया और कब सुरंग से बाहर निकल आए। सुरंग में अंधेरा नहीं रहने वाली यह बिहार की पहली सुरंग है।
बता दें, 22 अक्टूबर 2019 को बिहार की दूसरे सुरंग के लिए खुदाई कार्य शुरू हुआ था। दो साल तक खुदाई के बाद अब सुरंग बनकर तैयार है। इसके निर्माण से पटना और भागलपुर सहित मुंगेर, साहेबगंज और फरक्का रूट पर ट्रेनों के परिचालन समय में कमी आएगी। पूर्व रेलवे मालदा डिवीजन में जमालपुर और रतनपुर के बीच बनी दूसरी नई रेल सुरंग की लंबाई 341 मीटर चौड़ाई 7 मीटर और ऊंचाई 6.10 मीटर है।

0 टिप्पणियाँ