अब सभी शोधार्थियों को पीएचडी थीसिस ऑनलाइन होंगे। इससे थिसिस में डाटा चोरी करने वाले आसानी से पकड़े जाएंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी ने सभी राज्यों के शैक्षिक संस्थान को पीएचडी छात्रों की थीसिस को जल्द से जल्द अपलोड करने का निर्देश दिया है। इस बाबत आयोग के सचिव रजनीश जैन ने बताया कि 2019 के बाद से कई संस्थानों की ओर से थेसिस अपलोड नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में 2019 से अब तक सभी थीसिस को ऑनलाइन करना है। अभी पटना विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय और 12 अन्य विश्वविद्यालय की ओर से ही पीएचडी थीसिस को ऑनलाइन शोध गंगा सॉफ्टवेयर पर डाला जाता है। शेष विश्वविद्यालय की ओर से यह प्रक्रिया भी नहीं अपनाई जा रही है।
जल्द होगी सभी प्रक्रिया शुरू
बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति और तिलकामांझी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. हनुमान प्रसाद पांडे ने कहा कि पीएचडी थीसिस को ऑनलाइन करने के लिए प्रक्रिया की जा रही है। इसके लिए विश्वविद्यालय में कमेटी गठित की गई है। एकेडमिक काउंसिल से अप्रूव भी किया गया है। जल्द ही सभी थेसिस को ऑनलाइन करने की कवायद जल्द ही आरंभ होगी। ताकि चोरी पर अंकुश लगे। इस संदर्भ में पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमेश कुमार चौधरी ने बताया कि सभी पीएचडी थीसिस को शोधगंगा सॉफ्टवेयर के सहारे ऑनलाइन किया जाता है। इसमें डाटा चोरी भी आसानी से पकड़ी जाएगी।
ऑनलाइन होने से नैक में जुड़ेगा अंक
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पीएचडी छात्रों की थीसिस को अविलंब ऑनलाइन अपलोड करने को कहा गया है। इसके बाद राष्ट्रीय संस्थान रैंकिंग का उपयोग करके राष्ट्रीय प्रत्ययन बोर्ड रैंकिंग के लिए आवंटन किया जाएगा। यूजीसी के सचिव रजनीश कुमार के जैन के अनुसार 2019 के बाद से कई विश्वविद्यालय की ओर से पीएचडी थीसिस अपलोड नहीं किए गए। ऐसे में सभी विश्वविद्यालय को वर्ष 2019, 2020 और 2021 में पीएचडी करने वाले छात्रों की संख्या का डाटा एनबीए भारत रैंकिंग 2023 के लिए सुरक्षित करने को कहा गया है।

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