पटना नगर निगम कचरे को कमाई का साधन बनाने जा रही है। निगम के सभी अंचल में गीले कचरे से जैविक उर्वरक बनाने का काम शुरू हो गया है। जल्द ही इसकी पैकेजिंग और मूल्य निर्धारित कर दिए जाएंगे। इसकी बिक्री की नीति भी तैयार की जा रही है। पटना नगर निगम ने गीला और सूखा कचरा अलग अलग एकत्र करना शुरू कर दिया है। फिलहाल शहर से प्रतिदिन 570 टन से अधिक गीला कचरा निकल रहा है। तो वही 370 टन सूखा कचरा भी संग्रहित हो रहा है।
पाटलिपुत्र पानी टंकी के पास निगम ने जैविक उर्वरक बनाने के लिए पिट तैयार किया है। यहां गीले कचरे से जैविक उर्वरक बनाने का काम चालू है। तो वही नूतन राजधानी अंचल गर्दनीबाग कूड़ा पॉइंट के पास भी जैविक उर्वरक बनने लगा है।
यहां मीठापुर सब्जी मंडी से निकलने वाले कचरे से मशीन की मदद से उर्वरक बनाया जा रहा है। मशीन की मदद से 24 घंटे में उर्वरक तैयार हो जाता है। इसी तरह कंकड़बाग अंचल, बांकीपुर अंचल, पटना सिटी और अजीमाबाद अंचल भी उर्वरक तैयार कर रहे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में जैविक उर्वरक बनाने पर भी अंक निर्धारित हैं। तो वही अपर नगर आयुक्त शीला ईरानी ने कहा कि पिछले साल निगम के अंचलों में जैविक उर्वरक बनाने का कार्य शुरू हुआ था। और कोरोना के कारण यह कार्य बंद हो गया था। अब सभी अंचल गीले कचरे से जैविक उर्वरक बना रहे हैं। शीघ्र ही उवरक बिक्री की नीति बनकर तैयार हो जाएगी और कचरा कमाई का साधन बन जाएगा।

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